महिलाओं ने भेजी मोदी जी को हजारों सेनेटरी नैपकिन, वजह चौंकाने वाली

हमारे पीएम नरेंद्र मोदी जिस तरह देश के विकास में जुटे हैं उनका सामाजिक विकास के प्रति संवेदनशील भावनाओ से हर कोई परिचित होगा. यह बात मुख्य स्तर पर देखी जाती है कि मोदी जी महिलाओ के कल्याण के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं जिससे कोई भी महिला मुश्किलो से ना गुजरे. शायद इसी वजह से महिलाओ ने भी मुँह खोलकर अपने हक के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया है. उम्मीद की तकरार में नौबत यह आ चुकी है कि हज़ारों की तादाद में महिलाएं पीएम मोदी जी के पास “सेनेटरी नैपकीन” भेज रही हैं.

दरअसल इसकी खास वजह ये है कि जबसे जीएसटी लागू हुआ है सेनेटरी नैपकीन की कीमत में भारी उछाल हुआ है जिससे पीरियड जैसी समस्या के साथ अब नैपकिन की कीमत भी किसी सजा से कम नही है. इस हालत में महिलाओ ने मोदी जी के पास नैपकिन द्वारा कुछ मैसेज लिखकर भेज रही हैं जिससे मोदी जी उनके दुख को समझकर नैपकिन को GST के दायरे से बाहर कर दें.

महिलाओ के उत्थान में हो रहे काम

ऐसा पहली बार हुआ जब महिलाओ ने बिना संकोच के अपनी मांग रखी हो वरना ऐसे मुद्दे तो धरे के धरे रह जाते हैं लेकिन जिस तरह मोदी जी अपनी प्रजा के दुख और दर्द को समझते हैं महिलाओ ने यह मांग सीधा मोदी जी तक पहुंचाने का फैसला किया है.

जिस तरह बीजेपी सरकार ने “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” जैसी योजना से परिजनों को जागरूक बनाया है और महिलाओ के हित की बात की है ठीक वहीं उन्होंने उज्ज्वला योजना शुरू कर न जाने कितने गरीबों को खाना बनाने का साधन दिया है. वहीं ‛तीन तलाक’ जैसे मुद्दों का तो कोई मुकाबला ही नही जिसने स्त्री वर्ग की जिंदगी सवांरने की बात कही.

इस शहर से हुई शुरुआत

दरअसल महिलाओ ने ग्वालियर में एक अभियान शुरू किया है जिससे महिलाओ की यह आवाज सरकार तक पहुंच सके. इसके लिए उन्होंने नैपकिन पर हस्ताक्षर और साथ में पोस्ट कार्ड भी भेज रही हैं जिससे पीएम उनके दर्द को समझ सकें. हैरानी की बात है कि इसमें सभी प्रकार की महिलाएं एकजुट होकर आवाज उठा रही है और इनमें कोई संकोच की भावना नही है क्योंकि ये हक की लड़ाई है.

महिलाओ का क्या है कहना

अभियान में शामिल एक महिला प्रीति देवेंद्र जोशी ने बताया कि “सेनेटरी नैपकिन पहले भी काफी महंगा था तो हमलोग मुश्किल से खरीद पाते थे, अब जीएसटी के बाद इसकी कीमत आसमान छूने लगी है और पीरियड एक बार तो आता नही जो हम खरीद लें तो समस्या खत्म हो जाये. नतीजा यह हो चुका है कि सिर्फ मिडिल क्लास की महिलाएं ही इसे खरीदने में सक्षम है पर गरीब महिलाएं क्या करेंगी कैसे खरीद पाएंगे हम इतनी महंगी नैपकिन, इसलिए मोदी जी से निवेदन है कि नैपकिन को जीएसटी के दायरे से बाहर कर दें”.

धीरे-धीरे बढ़ेगा अभियान का स्तर

बता दें कि यह अभियान धीरे धीरे बड़ा रूप लेने वाला है क्योंकि इसमें शामिल होने वाली महिलाएं ही नही बल्कि किशोर लड़कियां व छात्राएं भी शामिल हैं. इन्होंने नैपकिन पर कलम से अपना दुखड़ा लिखा है और अभियान के तहत ये आवाज सत्ता की सरकार के पास पहुंचाना है. नैपकिन पर मैसेज भेजने का अभियान अभी 3 महीनों तक चलेगा जिसके बाद सूरे चरण में पोस्टकार्ड की मदद ली जाएगी. अभी यह मात्रा हजार नैपकिन में है फिर भी बात नही बनने पर लाखों तक का आंकड़ा छू सकती है ताकि इस अभियान के प्रति पूरा देश जागरूक हो सके.

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