नौकरी का लालच देकर लड़कियों को करता था अगवाह, फिर करवाता था ऐसे घिनौने काम

मेरठ : आज सरकार दिन ब दिन नए कानूनों द्वारा महिलाओ के सुरक्षा और अधिकार के लिए कड़े नियम बना रही है लेकिन इसके बावजूद भी उनपर प्रताड़नाओं का दुख कम नही हुआ. हमारी संस्कृति और सभ्यता में शुरू से ही स्त्रियों को देवी का रूप माना जाता है लेकिन आज का मामला इन सभी अवधारणा को कुचलकर स्त्री को सिर्फ भोग-विलास की चीज़ समझी जाती है. इतना वक़्त गुजर जाने के बाद भी कई मासूम लड़कियां आज वैश्याओं की जिंदगी जीने पर मजबूर हैं. इस बारे में अगर हम ये कहें कि पुलिस को शायद पता नही होगा तो ये गलत जा क्योंकि पुलिस को चप्पे-चप्पे के बारे में पता होता है लेकिन वो भी नोट हजम कर के मुंह बंद कर लेते हैं.

अभी हाल ही कि घटना है जब एक एनजीओ ने पुलिस की मदद मांगी और उस रेडलाइट एरिया पर छापेमारी करवाई जहां सालों से मासूम लड़कियां जानवरो की जिंदगी जी रही थी. जानकारी से पता चलता है कि पुलिसकर्मियों ने 4 महिलाओ को इस चुंगल से बचाने के अलावा उसकी मास्टरमाइंड मालकिन को ही कानून के शिकंजे में बांध दिया. जानिए क्या था पूरा मामला और कैसे पहुंची लड़कियां इस दलदल में…

छापेमारी के बाद खुला राज

दरअसल यह छापेमारी शहर के एसपी के अगुआई में हुई थी और जानकारी देने वाले एनजीओ के कर्मचारी थे. उस एनजीओ का नाम ‛फ्रीडम फर्म’ है जिसने यहां फंसी लड़कियों को मुक्त कराने का तरीका ढूंढा.

उसी एनजीओ के सुरेंद्र का कहना है कि इस रेडलाइट एरिया में लायी गयी सभी लड़कियां धोखे का शिकार हुई है दरअसल उन्हें नौकरी दिलवाने के झांसा देकर यहां लाया जाता था. फिर उन्हें रस्सियों से बांधकर उसके इज्जत को तार-तार किया जाता है जिसके बाद वह जिल्लत भरी जिंदगी जीने के लिए लाचार हो जाती हैं.

एनजीओ ने जुटाई थी खबर

काफी दिन की कोशिशों के बाद उन्हें पता चला कि इस वैश्याओं के इलाके में ऐसे कारनामे हो रहे हैं जिसकी खभर उन्होंने सिटी एसपी मान सिंह को दी और अपनी पुलिस बटालियन के साथ उन्होंने छापेमारी कर दी. यह इलाका शहर से थोड़ी दूर कबाड़ी बाजार के समीप स्थित था जहां देहधन्धा बड़ी स्वतंत्र रूप से चल रहा था. खबर के मुताबिक वहां से 4 नाबालिग लड़कियों को स्वतंत्र कराने के साथ-साथ उस कोठे की मालकिन को भी गिरफ्तार किया गया. अभी उन लड़कियों से पूछताछ जारी है जिससे पता चला है कि सभी लड़कियां राजस्थान की रहने वाली है.

सिटी एसपी ने इस बात का आश्वासन देते हुए कहा है कि पुलिस छापेमारी में सफल रही और मास्टरमाइंड पकड़ी गई. अभी तहकीकात जारी है जिसके बाद उनपर कड़ी कार्यवाई शुरू की जाएगी. जांच-पड़ताल से पता चला है कि वहां सभी लड़कियों की उम्र 16 से 20 साल के बीच की है और उन्हें नौकरी का ऑफर दिया गया था लेकिन यहां पहुंचते ही उन्हें जिस्म के सौदागरों के सामने सौंपा जाने लगा. हालांकि इस छापेमारी से पुलिस को इनके अन्य गिरोह का भी पता चल सकता है जिससे उक्त जगहों पर छापेमारी की जा सके. उस एनजीओ ने इन लड़कियों को मुक्त कराने में बहुत बड़ा योगदान दिया है और उनका कहना है कि वो ये अभियान जारी रखेंगे.

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