95 वर्षीय माँ भूखी मर रही है वृद्धाश्रम में , तीनों बेटों कहा-“बुढिया को मरने दो”

लखनऊ : दुनिया मे ऐसी कोई ताकत या मापदंड नही बना जो एक माँ की ममता को माप सके. जब किसी माँ के संतान को जरा सी खरोंच भी आ जाये तो माँ के दिल पर क्या गुजरती है ये सिर्फ माँ ही समझ सकती है. एक माँ जब ममता से अपने बच्चे को पाल-पोषकर बड़ा करती है तो उसे अपने बेटे से यही उम्मीद होती है कि वो मेरे जिंदगी के आखिरी पलों तक मेरा साथ देगा. लेकिन वही संतान जब बड़ा हो जाता है तो अपनी बूढ़ी माँ को किसी बोझ से कम नही समझता. जो माँ उसे दुनिया भर की मुसीबतों को सहकर पालती-पोषती है उसे ही घर से बेघर कर ममता का ये सिला देता है. एक ऐसी ही करुणामयी घटना सामने आ रहा है जहां 95 वर्ष की महिला अभी वृद्धाश्रम में रहने पर मजबूर है जबकि उसके 3 जवान बेटे भी हैं.

मौत का कर रही इंतजार

खबर से पता चलता कि इस बूढ़ी माँ ने 72 घंटो से एक निवाला भी नही खाया है और प्राण त्यागने का इंतजार कर रही है. वहां रह रहे अन्य वृद्धों से पता चलता है कि उस बूढ़ी माँ के 3 जवान बेटे भी हैं और वो लोग अच्छा रकम कमा लेते हैं. इसके बावजूद भी उनमें से हर बेटा इन्हें अपने साथ रखना बोझ समझता है. वृद्धा बताती है कि वह कई साल अपने बेटों का राह देखती रही लेकिन उससे कोई मिलने तक नही आया.

ये काम करते हैं तीनो बेटे

पूरी जानकारी मिलने से पता चलता है कि उस वृद्ध का नाम गंगा देवी है जो 3 सालों से लखनऊ के जानकीपुरम आश्रम में ज़िल्लतों वाली जिंदगी जी रही है. उस माँ के अनुसार तीनो लड़को में से एक पल्टन छावनी में अपनी पत्नी के साथ रहता है और एक स्कूल बस का ड्राइवर है. वहीं उस वृद्धाश्रम के निर्देशक ने बताया कि दूसरे बेटे की मृत्यु हो चुकी है और आखिरी बेटा भी अपना निजी टैक्सी चलाकर जीवन निर्वाह कर रहा है.

तीन दिनों से छोड़ चुकी खाना

वृद्धाश्रम के निर्देशक अर्जुन सिंह बताते हैं कि उन्होंने खुद उन तीनों बेटों से माँ से मिलने आने की बात की थी. लेकिन तीनो ने बात को खारिज करते हुए टाल दिया. माँ को पीड़ा तब होती है कि इतने सालों में उनके एक भी बेटे ने माँ का चेहरा देखना जरूरी नही समझा. अभी गंगा देवी ने 72 घंटो से अन्न गृह्न नही किया है खाने बोलो तो वह बोलती है कि सिर्फ मृत्यु चाहिए. वहां रह रहे अन्य वृद्ध बताते हैं कि वो अक्सर बीमार रहती है और अभी भी बीमार्ज है लेकिन बेटों के आने की आस मन मे बैठी है.

बेटों ने दिया इतना घटिया जवाब

गंगा देवी 95 वर्ष की हो चुकी है इस वजह से आश्रम में उपस्थित डॉक्टर भी ठीक से इलाज नही कर पा रहे हैं. उनका कहना है खाना नही खाने की वजह से उनका शरीर और भी काम करना बंद कर रहा है ऐसे में अगर उनका कोई भी बेटा इन तक पहुंच जाए तो उसके जीने के चांस हैं. आज से 4 साल पहले गंगा देवी के पति की मौत हो गयी थी जिसके बाद तीनों बेटों ने बची खुची जायदाद का तीन हिस्सा कर बूढी माँ को आश्रम में लाकर छोड़ दिया. एक खबर से यह भी पता चलता है कि जब उनके बेटों से मिलने की बात कही गयी तो सभी के जवाब कॉमन थे – “बुढ़िया जिये या मरे, मुझे कोई परवाह नही” मौत से तो वह बाद में मरेगी लेकिन माँ की ममता का ऐसी परिणाम देखकर वह पहले ही भीतर से मर चुकी है.

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