मुर्दे को जलाने के लिए ले गए थे श्मशान, जब आग लगाई तो मृतक उठ खड़ा हुआ और फिर…

जिस तरह सूर्य कभी पश्चिम में नही उग सकता उसी तरह इंसान हमेशा के लिए जीवित नही रह सकता. इस ब्रह्मण्ड का अकाट्य सत्य है – मृत्यु जिसे कोई भी शख्स अपने तर्क से झुठला नही पाया है. जब भगवान श्रीकृष्ण को ही प्राण त्यागना पड़ा तो इंसान क्या ठहर सकता है. सभी जानते हैं कि मृत्यु के बाद शव को श्मशान ले जाकर उसका दाह संस्कार करते हैं लेकिन तब क्या माजरा बनेगा जब जलता हुआ शव अचानक से खड़ा हो जाये? कुछ ऐसा ही अनहोनी घटना सामने आ रहा जब जलती हुई चिता से शव खड़ा होकर राम-राम कहने लगा. वहीं जलाने गए कुछ लोग ये माजरा देखकर बेहोश हो गए. चलिये जानते हैं पूरा मामला…

आग लगते ही जिंदा हो उठा मुर्दा

ये हैरान कर देने वाली घटना पटना के मोकामा श्मशान घाट पर हुआ जब परिजन और सगे संबंधी मृत हो जाने पर उसके शव को श्मशान लेकर आये थे. नियमानुसार सभी रस्म किये गए और मुखाग्नि पड़ते ही मुर्दा राम-राम कहते हुए चिता पर खड़ा हो गया। आप सोच सकते हैं कि तब वहां मौजूद लोगों का क्या हाल हुआ होगा जब मुर्दे को जलती चिता से निकलता देख लें. वहां खड़ी भीड़ ये वाकया होते देख वहां से भागने लगे वहीं कुछ बुजुर्गों ने पास जाने की हिम्मत दिखाई और देखा कि शख्स सच मे जिंदा हो चुका था और सांसे ले रहा था, आग से निकले उस व्यक्ति की जब सवाल किए गए तो असली सच्चाई सामने आई.

जुबान पर था राम-राम

खबर के मुताबिक वह शख्स मोकामा के मराची गांव का रहने वाला है और बीते दिन ठंड से उसकी मृत्यु हो गयी. परिजनों ने जब नब्ज चेक किया तो वह मृत मिला और घरवाले रोने लगे. हिन्दू धर्म की परंपरा के अनुसार उसके दाह संस्कार की तैयारियां की गई. वहां मौजूद लोगों से पता चलता है कि जैसे ही मुर्दे की चिता को आग लगाया गया लकड़ियां बिखरने लगी और मुर्दा अपनी जगह से खड़ा हो गया. उसके मुख पर सिर्फ एक ही बात थी – “राम-राम” जैसे वह मृत्यु के मुँह से निकलकर आया हो. सिर्फ वहां उपस्थित लोग ही नही बल्कि श्मशान के कर्मचारी भी इतना भयभीत घटना देखकर वहां से भागने लगे.

मृतक ने बतायी असली कहानी

अपनी आंखों के सामने इतनी बड़ी घटना होते देख लोग स्तब्ध रह गए वहीं मुर्दे ने सारी सच्चाई बता दी. उसने अपने जिंदा रहने का सुबूत देते हुए बताया कि बीते रात उसे जोर से ठंड लगी और अपनी चेतना खो बैठा. मृतक को जिंदा जानकर लोग बहुत खुश हुए वहीं घर वालों के लिए यह किसी त्योहार से कम नही था. जब डॉक्टर्स से इसकी वजह पूछी गयी तो उन्होंने बताया कि ठंड बढ़ जाने की वजह से उस व्यक्ति की सांसे रुक गयी थी और वो हम पता लगा सकते थे लेकिन गांववालों ने खुद ही इस बात का निर्धारण कर लिया. लेकिन दाह के बाद जब उसके मुख और शरीर को गर्मी मिली सांसे फ़िर से मजबूत हो गयी और शख्स नार्मल हो गया. फिलहाल उस परिवार में रौनक छाया हुआ है लोग उसे जिंदा पाएकर बहुत खुश हैं.

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