जिसे भिखारी समझ दुत्कार रहे थे लोग, वह निकला करोड़पति

ऊपर वाला सबको एक जैसा नहीं बनता किसी को कम तो किसी को बहुत ज़ादा दे देता है। जैसे राह में मिलते भखारियों का ही उदाहरण ले लीजिये। खुद के लिए 2 वक़्त की रोटी का जुगाड़ कर पाना भी इनके लिए बड़ा मुश्किल होता है। जिन्हे हम भिखारी समझ कर दुत्कार कर भगा देते हैं, हम शायद यह भी भूल जाते हैं ये भाखरी कई बार हमसे भी अमीर होते हैं। वैसे भी आपने इंटरनेट पर बहुत सारी ऐसी कहानियां सुनी होंगी जिसमे भिखारियों के माकन, मोटा बैंक बैलेंस और खुद की बड़ी बड़ी दुकाने भी होती हैं।

हमे एक स्टोरी लिखी थी जिसमे हमने ज़िक्र किया था ऐसे भिखारी का जिसकी सिर्फ एक दिन की कमाई 1 लाख रूपए के ऊपर हिअ र अपने बच्चों को विदेश में पढ़ा रहा है। खुद का बड़ा मकान भी है, और तो और भीख में मिले पैसों को गिनने के लिए इसने लोग भी रखे हुए हैं।

लेकिन आज हम जिस भिखारी के बारे में बात करने जा रहे हैं वो कोई असली का भिखारी नहीं है लेकिन परिस्थितियों की वजह से इधर उधर भटक रहा था, लेकिन जब लोगो को उसकी सच्चाई के बारे में पता चला तो सबकी आँखें फटी रह गयी।

मामला उत्तर प्रदेश के रायबरेली का है जहां पर एक भिकारी कई दिन से भीख मान रहा था, लेकिन भिखारी भीख भी ज़्यादा न मांग कर खाना मांग रहा था, लगो को बुज़ुर्ग के ऊपर दया आ गयी और उसे मिठाई खिलाई फिर नहला धुला कर अच्छे से रक्खा। कुछ देर बाद जब लोगो की उसके बैग पर अंज़र पड़ी तो सबके होश उड़ गए।

जिसे लोग भिखारी समझने की गलती कर रहे थे वो करोड़पति इंसान निकला। दरअसल हुआ कुछ यूँ के इस व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक ने होने की वजह से ये इधर उधर खाने की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर भटक रहा था। इनका ध्यान रखने वालों ने बैग में एक पर्ची देखी, पर्ची किसी फिक्स डिपाजिट जैसी मालूम हो रही, पर्ची में लगभग 1 करोड़ 62 लाख की रकम दर्ज थी। आपको बता दें यह व्यक्ति तमिलनाडु से है और किसी ट्रैन यात्रा के दौरान अपने परिवार से बिछड़ जाने पर इनका मंसित संतुलन खो गया था, फ़िलहाल इनके घर वाले इनको घर वापस ले जा चुके हैं।

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