मृतक महिला का अचानक चिता पर लेटे हुए फट गया पेट, अंदर से निकली हैरान कर देने वाली चीज़!

हमारे भारत देश में आये दिन कोई ना कोई घटना हमारे सामने आती रहती है. परन्तु, इनमे से कुछ घटनाएं ऐसी भी होती हैं, जिन पर यकीन कर पाना आसान नहीं होता. कुछ ऐसा ही अजीबो गरीब मामला हाल ही में हमारे सामने आया है. इस घटना पर यकीन करना खासा मुश्किल है .आज तक ऐसा न कभी हुआ है ना ही आपने कभी देखा होगा. परंतु, ये घटना एकदम सच्ची घटना है .ऐसा सामने आया है के डॉक्टर की लापरवाही  की वजह से इस घटना का जनम हुआ . इस घटना को देख कर सभी हैरान रह गए .आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि ये घटना रायगढ़ की है. जहाँ एक डॉक्टर की लापरवाही की वजह से एक जीती जागती महिला की जान चली गयी . अस्पताल वालों ने महिला को मृत घोषित कर दिया . जिसके बाद उसके शव को जलाने के लिए परिजन उसको श्मशान ले गये.

जब उस औरत को चिता पर लेटाया गया, तो चिता पर लेटने के बाद जो हुआ उसकी आशंका किसी को भी नहीं थी.  दरअसल , जब औरत को जलाने के लिए चिता को लेटाया गया तो उसमे एक जोरदार धमाका हुआ .इस धमाके को देख कर आस पास के सभी लोग  हैरान रह गए .केवल इतना ही नहीं बल्कि, इस अचानक हुए धमाके से औरत का पेट फट गया और उसमे से नवजात शिशु चिता के पास निकल के गिर गया. जिसको देख वहां मौजूद सभी लोग भोच्क्के रह गये.

जिन  लोगो ने भी इस घटना को अपनी आँखों से देखा है, उन लोगो को ये सारा दृश काफी अजीब लग रहा था. जानकारी के अनुसार मृतक महिला का पति  इस घटना को देख कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगा . जिस बाप ने अपने बचे को गोद  मे  खिलाने के सपने देखे थे, उस बाप को अपने बच्चे का चेहरा भी देखना नसीब ना हो सका. दरअसल, ये पूरी घटना  डॉक्टर की गलती के कारन हुई थी. जरा सोचिये उस बाप पर क्या बीती होगी जब एक ही पल में उसका पूरा परिवार उसके सामने उजाड़ गया होगा? मिली जानकारी के अनुसार  ये घटना डभरा कौंलाझर की रहने वाली 22 वर्षीय गर्भवती औरत  की है .जिसकी  डिलवरी के लिए 17 जनवरी की तारीख निश्चित की गई थी.

दरअसल, मृतक महिला की डिलीवरी से कुछ दिन ओएहले ही उसके हाथ पैर सूज गये थे. जिसके बाद जब घरवालों ने उसके हाथ पैरो को देखा तो वह उसको अस्प्ताल ले गये. वहां  24 दिसंबर को हॉस्पिटाल  में भर्ती कर दिया था .जाँच के दौरान  पता चला कि महिला में सिर्फ 5 ग्राम हीमोग्लोबिन की मात्रा थी जो कि सामान्य से 3 यूनिट कम थी .इसके इलावा उस महिला का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था परन्तु अस्पताल वालों ने उन्हें ए नेगेटिव ब्लड का इंतज़ाम करने की सलाह दी.

ब्‍लड के लिए दुर्गेश नाम के युवक से व्यवस्था करवाया गया 24 घंटे बाद 26 दिसंबर को पहुंचे तो लैब में उपस्थित कर्मचारी ने उनसे ए निगेटिव ग्रुप का ब्लड लाने को कहा इसके बाद परिजन के साथ आए अविनाश पटेल ने बताया कि दूसरी बार में 27 को दलाल से उन्होंने 16 सौ रुपए में ए निगेटिव ब्लड खरीदा.

इसके बाद भी डॉक्टर्स ने बताया कि महिला को दो यूनिट ब्लड की जरूरत है जिसके बाद उन्होंने 28 को दलाल से 45 सौ रुपए में ब्लड ख़रीदा . परंतु, तब तक काफी देर हो चुकी थी .उस मृत औरत  के पति का कहना था की ये सब डॉक्टर और उनके स्टाफ की लापरवाही की वजह से हुआ है . डॉक्टर अगर गलत खून नही चढाते तो आज वह औरत और उसका बच्चा सही सलामत दुनिया में होते.

केवल इतना ही नहीं बल्कि, डॉक्टर्स ने महिला के मरने के बाद भी उसके पेट के बच्चे के बारे में ज़िक्र नहीं किया. जिसके बाद अंतिम संस्कार के समय पेट से बहर निकल कर गिर गया. वहां मौजूद लोग मृतक महिला के पति को देखने  देखने के इलावा कुछ कर  न सके .

 

 

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